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सर्व धर्म एकता समिति
प्रकृती में ईश्वर प्रत्यक्ष रूप में नहीं प्राप्त होता , परन्तु सद् विचारो से प्रत्यक्ष होता है ! ऐसा ही एक सद् वि चार समाज सेवी श्री राजू प्रजापत जी के मन में तब आया जब वे अपनी ऊर्जावान युवावस्था में समाज एवं राष्ट्र तथा अपने इर्द-गिर्द फैली बुराईंयों और कुरीतियों टकराव एवं संघर्ष को देखते हुए धर्म कार्य का सेवन कर रहे थे ! इसी कड़ी में प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग  “मंमलेश्वर ” ॐ कारेश्वर तीर्थ से लौटते हुए आपके मन  में वही उपरोक्त ईश्वरीय सदृश्य विचार कि जिस तरह में धर्म के लाभों को लेता हु क्या सभी लोग धर्म के वह लाभ ले पाते है !
तभी से प्रारम्भ हुआ निशुल्क तीर्थ यात्राओं का सेवा कार्य !
प्रथम यात्रा हेतु हुई , सन 1999 में , लगभग २००० तीर्थ यात्रियों का पंजीयन कर लेने व सफलता पूर्वक तीर्थों को करा ॐ कारेश्वर यात्रा संपन्न की ! इन परिस्थितियों में आप श्री से कई गणमान्य और वरिष्ठ मित्रो का परामर्श हुआ की एक समिति का गठन कर निर्धन बेटियों का कन्यादान तथा नशामुक्ति एवं सदमार्ग हेतु विभिन्न कथाये एवं प्रवचनों आदि का भी आयोजन किया जाना चाहिये ! अंततः सभी वर्ग एवं धर्मो का उसमे समावेश हो सके ! एवं अंतीम पंक्ति के व्यक्ति को भी जोड़कर लाभान्वित करने हेतु सर्व सम्मती से लगभग १२ वर्षों के सेवा कार्यो तथा सम्मलित प्रयासों  से सर्व धर्म एकता समिति के नाम से यह सेवा समूह पंजीकृत हुआ। सन २०११ में बीज बोया गया ! यह बीज एक विशेष वार्षिक आयोजन गणेश उत्सव के रूप में प्रान्त एवं सम्पूर्ण भारत वर्ष में ख्याति को प्राप्त होता हुआ राष्ट्रहित में कई मंचीय कार्यक्रम एवं नारीसशक्ति करण व महिला सहभागिता को हेतु आप स्वयं ने भाभी माँ श्रीमती तुलसी प्रजापत को आग्रह पूर्वक समिति के समाज सेवी कार्यों में उस समय उतारा गया ! जब महिलाओ के लिए इन समस्त कार्यो में भागीदारी सहज ना थी !
इसी क्रम को पार दर्शिता एवं कर्मठता से निभाते हुए अपने माता पिता , गुरुजनो एवं वरिष्ठों के मार्गदर्शन एवं सहमति से सेवा कार्यो एवं उत्सवो के उपक्रमों को श्री विजय प्रजापत जी ने सन २०१७ से अध्यक्ष पद पर रह कर जिम्मेदारी पूर्वक निभाया !
“मंज़िल नहीं यह पड़ाव हे दौरे कारवां का”….
सभी उन साथियों के इंतज़ार में जो राष्ट्र और समाज के लिए कुछ जज्बा रखते है , समिति अहवान करती है सभी विचारो एवं मित्रो का !